सुंदर है जिसकी काया


माखण मिस्ती जिसने खाया।


मनमोहक है जिसकी माया


गोपीओ संग जिसने रास रचाया ।


नरसिंह ने भी जिसका गुणगान गाया


राधा रानी के है जो छाया


सुदामा ने सच्चा दोस्त जिसमें पाया


मीराबाई ने तो उसके सिवा और कुछ नहीं

भाया


जिसने हर किरदार बखूबी निभाया


माखण मिस्ती जिसने खाया।


ऐसे भगवान पुरुषोत्तम को जनमदिन की खूबखूब बढ़ाईया। 
                           :Sunita B Pandya

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