कल युग की नारी हूं(kalyug ki nari hu)hindi Poem by Sunita B Pandya
कल युग की नारी हूं(kalyug ki nari hu)hindi Poem by Sunita B Pandya कल युग की नारी हूं मैं कल युग की नारी हूं मैं कल का भविष्य निश्चित करने योद्धा की तरह लड़ती हूं लाखों शब्दों को पढ़कर बनी, सुंदर सी एक पंक्ति हूं मैं समझना चाहते हो भीतर से मुझे तो, प्रकृति को देखो करीब से लाचार, डरपोक, बेचारी की छवी बदलने आई हूं रणचंडी बनकर मैं नई पीढ़ी से कदम मिलाने, हर क्षेत्र से माहितगार हूं मैं फास्ट फूड की नई पीढ़ी को, सात्विक आहार खाना शिखाती हूं मैं परंपरा और संस्कृति का संवर्धन करके, आधुनिकता की अंधी दौड़ से दूर रहना शिखाती हूं मैं हर नई टेक्नोलोजी से माहितगार बनकर, जनरेशन गैप को मिटाती हूं मैं एलोपैथी के युग मे दlदीमा के नुस्खे की भी जानकारी रखती हूं मैं हर रिश्ते को बखूबी निभाना, वरदान लेकर आई हूं मैं रसोड़े की रानी हूं मैं, वाहन भी चलाना जानती हूं मैं सजना संवरना पसंद है मुझे, किसी की जिंदगी भी संवारना जानती हूं मैं Like,Share And Subscribe My YouTube channel to watch Heart touching poem. Kalyug ki nari hu hindi Poem by Sunita B Pandya
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